Saturday, March 7

रक्सौल अस्पताल में शीतलहर के बीच लौटी व्यवस्थाओं की ‘गर्माहट’, मरीजों को मिली ठिठुरन से राहत

रक्सौल।(Vor desk)।भीषण ठंड और शीतलहर के बीच के बीच रक्सौल स्थित अनुमंडल अस्पताल में मरीजों के लिए व्यवस्था दुरुस्त हो चली है।जिस अस्पताल में चंद दिनों पहले मरीज कांपने को मजबूर थे, वहां अब मुकम्मल इंतजाम दिख रहे हैं।अस्पताल प्रबंधन ने सक्रियता दिखाते हुए न केवल खराब पड़े एसी और हीटिंग सिस्टम को दुरुस्त किया है, बल्कि मरीजों के लिए गर्म कपड़ों और बिस्तरों की कमी को भी दूर कर दिया है।हालांकि,इस पूर्ण वातानुकूलित अस्पताल कई एसी अभी भी खराब हैं,लेकिन,लेबर डिपार्टमेंट,ओटी,और वार्डों में एसी ठीक करा दिए गए हैं और कुछ नए लगाए गए हैं।हीटर की भी व्यवस्था मौजूद है। वहीं,प्रसव और बंध्याकरण के लिए पहुंची महिला मरीजो के लिए कम्बल और सतरंगी चादर की व्यवस्था भी कर ली गई है।शनिवार को अस्पताल में सर्जन डॉ विजय कुमार के नेतृत्व में करीब18महिलाओ को बंध्याकरण किया गया।इन्हें स्वास्थ्य प्रबंधक आशीष कुमार व परिवार नियोजन परामर्शी सौरभ मिश्रा के देख रेख में अस्पताल प्रबंधन  की ओर से  चादरें और कम्बल उपलब्ध कराई गई हैं।हालाकि,उनके एटेंडेंट और रिश्तेदार अपने अपने   घर से कम्बल,चादर , गर्म कपड़े आदि ले कर पहुंचे हैं।बंध्याकरण के लिए विभिन्न ग्रामीण क्षेत्र से पहुंची पूजा देवी, सुनीता देवी आदि ने बताया कि अस्पताल की ओर से चादर और कम्बल दी गई है।गर्म पौष्टिक भोजन,चाय, गर्म पानी भी मेनू अनुसार उपलब्ध कराया गया है।इससे पहले मरीज गर्म कपड़ों की गठरी झोला बोरा में बांध कर लाने को मजबूर थे। बीते मंगलवार की रात्रि एसडीएम मनीष कुमार ने औचक निरीक्षण किया, जिसमे प्रसव पूर्व ,उपरांत वार्ड में आधा दर्जन महिला मरीजों को कम्बल नहीं उपलब्ध कराया गया था,जबकि,चादरें गंदी थी,जिसे कई दिनो से बदला नहीं गया था।निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में व्यवस्थाओं को सुधारना शुरू कर दिया है। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. स्वाति सपन ने बताया कि अब पर्याप्त मात्रा में नए कंबल और ‘सतरंगी चादरें’ (सप्ताह के सात दिनों के लिए अलग-अलग रंग की चादरें) खरीद ली गई हैं। बीते बुधवार दिनों दस और आज  18महिलाओं का सफल बंध्याकरण ऑपरेशन किया गया है । इन सभी महिला मरीजों को तुरंत नए कंबल और साफ चादरें उपलब्ध कराई गईं। उपाधीक्षक के अनुसार, अब रोस्टर के आधार पर प्रतिदिन बेड की चादरें बदली जाएंगी और मरीजों को ठंड से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम रहेंगे।भविष्य में भी इसे सुचारू रखा जाएगा।

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