
वीरगंज (पर्सा),नेपाल।(Vor desk)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे सुनियोजित हमलों, हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ शनिवार को नेपाल के वीरगंज में जबरदस्त जनाक्रोश देखा गया। विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के आह्वान पर आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शनिवार शाम को वीरगंज की सड़कें विरोध के नारों से गूंज उठीं और प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे इस अमानवीय कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
विरोध जुलूस का शुभारंभ वीरगंज के ऐतिहासिक माईस्थान मंदिर परिसर से हुआ। प्रदर्शनकारी नगर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होते हुए नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। युवाओं के नेतृत्व में निकला यह जुलूस जैसे ही शहर के मुख्य केंद्र घंटाघर पहुंचा, वहां आक्रोश चरम पर दिखा। बांग्लादेशी कट्टरपंथियों और वहां की सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश का राष्ट्रीय ध्वज जलाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
घंटाघर पर आयोजित नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने बांग्लादेश में जारी हिंसा को मानवता पर कलंक बताया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक होने के कारण हिंदुओं को प्रताड़ित करना, उन्हें पेड़ों से बांधकर जलाना और उनकी हत्या करना पूरी तरह से अमानवीय कृत्य है। वक्ताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि अल्पसंख्यकों पर इस तरह के अत्याचार नहीं थमे, तो यह स्थिति बहुसंख्यक क्षेत्रों में भी तीव्र प्रतिकार की भावना को जन्म देगी, जिसकी जिम्मेदारी वहां की सत्ता की होगी।
प्रदर्शन के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से भी विशेष अपील की गई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि वैश्विक संगठन बांग्लादेश में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का तत्काल संज्ञान लें और वहां के हिंदू समुदाय के जान-माल की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश सरकार पर कड़ा दबाव बनाएं।
नगर की संवेदनशीलता और प्रदर्शन के उग्र स्वरूप को देखते हुए पर्सा पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत शहर के मुख्य चौराहों और संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। पुलिस की कड़ी निगरानी के बीच यह प्रदर्शन संपन्न हुआ, जिसमें दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और हिंसा को तत्काल रोकने की पुरजोर मांग की गई।
