
रक्सौल (VOR Desk)। रक्सौल पुलिस ने त्रिलोकी नगर मोहल्ले में हुई लाखों की चोरी का पर्दाफाश करते हुए यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथों से बच नहीं सकता। पुलिस ने महज 36 घंटे के भीतर न सिर्फ कांड का सफल उद्भेदन किया, बल्कि चोरी गए हीरे और सोने के जेवरातों के साथ सात आरोपियों को दबोच लिया। चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि इस पूरी वारदात की साजिश पीड़ित के पड़ोसियों ने ही रची थी।
भरोसे का कत्ल: बगलगीर ही बने ‘मास्टरमाइंड’
थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार सात आरोपी—टुन्ना, राजबाबू, कृष, कन्हैया, मोहित, सुमित और टेंगारी—पीड़ित ट्रांसपोर्ट व्यवसायी उदय शंकर प्रसाद के घर के आसपास के ही रहने वाले हैं। पड़ोसी होने के नाते उन्हें घर के अंदरूनी रास्तों और कीमती सामानों की जानकारी थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उन्होंने 17 दिसंबर की रात छत के रास्ते घर में प्रवेश किया और करीब 10 लाख से अधिक की संपत्ति समेट ली थी।
पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, बंटवारे से पहले दबोचे गए
घटना के बाद एसडीपीओ मनीष आनंद के नेतृत्व में बनी स्पेशल टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। जैसे ही पुलिस ने संदेह के आधार पर छापेमारी शुरू की, गिरोह में हड़कंप मच गया। पुलिस ने इन सभी को उस वक्त दबोचा जब वे चोरी के आभूषणों और नकदी का आपस में बंटवारा करने की योजना बना रहे थे। पुलिस ने इनके पास से:
- चोरी किए गए हीरे, सोने और चांदी के आभूषण (पोटली में बरामद)
- दो महंगे स्मार्टफोन
- बड़ी मात्रा में नकद राशि बरामद की है।
थानाध्यक्ष की चेतावनी: अपराधी की जगह जेल में
थानाध्यक्ष ने बताया कि कांड संख्या 534/25 के तहत सभी सातों आरोपियों को शनिवार को मोतिहारी जेल भेज दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में शांति व्यवस्था भंग करने वाले और चोरी-छिनैती की घटनाओं में संलिप्त लोगों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा। पुलिस की इस त्वरित कामयाबी पर पीड़ित परिवार और स्थानीय व्यवसायियों ने राहत की सांस ली है।
