
रक्सौल/मोतिहारी।(Vor desk)। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में पछुआ हवा के प्रभाव से सीमावर्ती क्षेत्र रक्सौल सहित पूरे जिले में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। मौसम के बदलते मिजाज और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने बड़ा कदम उठाया है। जिले के सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में शैक्षणिक गतिविधियां 21 दिसंबर तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, पूर्व से निर्धारित परीक्षाएं इस आदेश से मुक्त रहेंगी। डीएम ने स्पष्ट किया है कि शीतलहर की निरंतर समीक्षा की जा रही है और आदेश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच शुक्रवार की सुबह रक्सौल और आसपास के इलाके घने कोहरे की चादर में लिपटे रहे। दृश्यता (विजिबिलिटी) इतनी कम थी कि स्टेशन रोड, हवाई अड्डा रोड और आईसीपी बाईपास पर वाहनों की हेडलाइट्स जलने के बावजूद पहिए रेंगते नजर आए। करीब 10 बजे तक सूर्य देव के दर्शन नहीं होने से वातावरण में कनकनी बनी रही। कड़ाके की ठिठुरन के बीच रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर यात्री बेहाल दिखे। इस बीच, नगर परिषद ने राहत कार्य शुरू करते हुए शहर के प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की है। सिटी मैनेजर अविनाश कुमार राव ने बताया कि बाटा चौक, पंकज चौक, स्टेशन रोड और अनुमंडल कार्यालय सहित कई व्यस्त इलाकों में अलाव जलवाए गए हैं, जहाँ शाम ढलते ही लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है।
वहीं, बिगड़ते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है। रक्सौल पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि दिल और सांस के मरीजों के लिए यह समय काफी संवेदनशील है, इसलिए वे सुबह की ठंड से बचें और हमेशा गर्म पानी व ऊनी कपड़ों का प्रयोग करें। चिकित्सकों ने किसी भी असहजता की स्थिति में तुरंत अस्पताल से संपर्क करने की अपील की है।
