Sunday, March 8

रक्सौल प्रखंड के विद्यालयों में अभिभावक–शिक्षक संगोष्ठी सम्पन्न, शिक्षा की गुणवत्ता सुधार पर जोर!

रक्सौल।(Vor desk)।
रक्सौल प्रखंड के विभिन्न प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में शनिवार को “हर बच्चा होगा अब स्कूल का हिस्सा” तथा “निपुण बनेगा बिहार” थीम पर अभिभावक–शिक्षक संगोष्ठी का उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाकर विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाना था।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय राष्ट्रीय गांधी में प्रधानाध्यापक मुनेश राम के नेतृत्व में संगोष्ठी सम्पन्न हुई। एचएम बृजकिशोर प्रसाद और विद्यालय टीम ने अभिभावकों का स्वागत करते हुए बच्चों की उपस्थिति, घर पर पढ़ाई की निगरानी और सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया। अभिभावकों ने भी विद्यालय की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
रा.मध्य विद्यालय पनटोका में एचएम कुंदन कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की और अभिभावकों के साथ शैक्षणिक प्रगति, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, तथा शिक्षण व्यवस्था पर चर्चा की। अभिभावकों ने बेहतर शिक्षण माहौल के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
एकेडरवा विद्यालय में एचएम प्रविण कुमार श्रीवास्तव ने अभिभावकों को बच्चों की निरंतर उपस्थिति और घर में अध्ययन व्यवस्था पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने बताया कि शिक्षक-अभिभावक संवाद बढ़ने से सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
उत्क्रमित मध्य विद्यालय भरतमही, राम प्राथमिक विद्यालय रेलवे रक्सौल और रामरति कन्या प्राथमिक विद्यालय में भी संगोष्ठी उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुई। अभिभावकों ने विद्यालय समय में शिक्षकों द्वारा मोबाइल उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि शिक्षक पूरी निष्ठा से शिक्षण कार्य में ध्यान दें, तो सरकारी विद्यालयों की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। वहीं कई अभिभावकों ने विद्यालयों की वर्तमान शिक्षण व्यवस्था की सराहना भी की।
महिला अभिभावकों की उपस्थिति इस बार विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिससे संगोष्ठी और प्रभावी बन गई। अभिभावकों का कहना था कि सरकारी विद्यालयों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक मौजूद हैं। यदि शिक्षण में निरंतरता बनी रही तो निजी विद्यालयों की ओर जाने वाली भीड़ स्वतः कम हो जाएगी।
रक्सौल प्रखंड के विद्यालयों में आयोजित यह अभिभावक–शिक्षक संगोष्ठी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे बच्चों के सीखने के परिणाम बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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