Saturday, March 7

रक्सौल: विधानसभा चुनाव में जिला बनाने का मुद्दा निर्णायक, नेताओं के वादे और चुप्पी से गरमाई सियासत!

रक्सौल।(Vor desk)।नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति विधानसभा है।बिहार विधान सभा चुनाव2025 में अपनी सबसे पुरानी मांग—जिला बनने का दर्जा—को लेकर राजनीतिक अखाड़े का केंद्र बन गया है। रक्सौल की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका वोट उसी दल या नेता को मिलेगा जो इस लंबित मांग को पूरा करने का ठोस आश्वासन देगा। यहां नारा लग रहा है -‘जिला बनाने की कसम खाओ और जनता का वोट पाओ’!
स्थानीय निवासियों और नगर परिषद और पंचायतों के जन प्रतिनिधियों की यह मांग इसलिए भी जायज है क्योंकि शहर वर्तमान जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर है, जिससे प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मुखिया सुमन पटेल ने लोक सभा चुनाव के समय भेलाही के मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्ञापन सौंपकर इस मुद्दे को शीर्ष स्तर पर उठाया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से सकारात्मक संकेत भी मिले थे।
हालांकि, चुनावी माहौल में यह मुद्दा अब आर-पार की लड़ाई बन गया है। महागठबंधन के नेताओं ने इस मांग को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। महागठबंधन प्रत्याशी श्याम बिहारी प्रसाद ने वादा किया है कि चुनाव जीतने के बाद रक्सौल को जिला बनाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।वे पहले भी इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और आदापुर में तत्कालीन मुख्यमत्री जीतन राम माझी से भी जिला बनाने की मांग की थी,जिस पर आश्वासन मिला था।वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय उपाध्याय ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट घोषणा की है कि अगर बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी, तो रक्सौल को निश्चित रूप से जिला बनाया जाएगा।
इसके विपरीत, एनडीए खेमे की चुप्पी ने स्थानीय मतदाताओं की असंतुष्टि को और बढ़ा दिया है। सांसद और प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने बीते दिनों पत्रकारों के इस संवेदनशील सवाल को टाल दिया।यही नहीं चुनावी मंच पर चर्चा तक नहीं की।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी नरकटिया विधानसभा की अपनी चुनावी सभा में इस बारे में कोई बयान नहीं दिया, जबकि लोगों को उनसे बड़ी उम्मीद थी। पूर्व में जन प्रतिनिधियों द्वारा किए गए वादे पूरे न होने के इतिहास को देखते हुए, रक्सौल के लोग अब किसी भी दल के कोरे आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन, लोगों की नजर एनडीए पर टिकी है कि वह इस निर्णायक मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करती है या नहीं, क्योंकि रक्सौल की जनता ने गोलबंदी शुरू कर दी है और यह मुद्दा निश्चित रूप से इस बार के विधानसभा चुनाव परिणामों को गहराई से प्रभावित करने वाला है।

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