
रक्सौल।(Vor desk)।बिहार विधानसभा चुनाव इस बार केवल राजनीतिक भविष्य का फैसला नहीं कर रहा, बल्कि यह लोकतंत्र में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को मजबूती देने का एक बड़ा उत्सव बन चुका है। पिछले कई चुनावों से यह स्पष्ट हो चुका है कि बिहार में महिला मतदाता अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं, और उनके वोट का प्रतिशत पुरुषों से भी अधिक रहकर सरकार के गठन में महत्वपूर्ण साबित होता रहा है।
इसी महत्व को समझते हुए, चुनाव आयोग के निर्देश पर, रक्सौल प्रखंड में महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व तैयारी की गई है। यहां के पिंक बूथों समेत ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न मतदान केंद्रों पर 140 आशा कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से ‘सहयोगिनी’ के रूप में तैनात किया गया है।आशा कार्यकर्ता पिंक ड्रेस में मतदान केंद्रों पर ओआरएस ,पैरासिटामोल, मेट्रिंडाजॉल जैसी दवाओं के साथ तैनात रहेंगी।यही नहीं अभी से उन्होंने अपने अपने पोषक क्षेत्र में अभियान चला कर ज्यादा से ज्यादा मतदान को ले कर जन जागरूकता चला रही हैं,ताकि,घर घर से महिला वोटर मतदान को निकले।

रक्सौल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. राजीव रंजन कुमार के नेतृत्व में इन्हें गहन प्रशिक्षण मिला है। मेडिकल ऑफिसर डा. अमित जायसवाल, स्वास्थ्य प्रबंधक आशीष कुमार, बीसीएम सुमित सिन्हा, और यूनिसेफ के बीएमसी अनिल कुमार जैसे अधिकारियों ने आशा कार्यकर्ताओं को व्यवहार कुशलता और त्वरित सहायता के गुर सिखाए हैं।
इन प्रशिक्षित आशा सहयोगिनियों का मुख्य काम युवतियों, महिलाओं, खासकर बुजुर्ग और दिव्यांग महिला वोटरों को बिना किसी झिझक के मतदान करने का सहज और सुरक्षित माहौल देना है। वे मतदान केंद्र पर पहुँचने वाली प्रत्येक महिला वोटर को वोट डालने से लेकर वापस घर लौटने तक पूरी सेवा और सहयोग प्रदान करेंगी।डा राजीव रंजन का कहना है कि यह कदम न केवल महिलाओं का मतदान प्रतिशत बढ़ाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आधी आबादी पूरे सम्मान और सुविधा के साथ अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सके।
