
रक्सौल।(बिहार)।(Vor desk)। भारतीय संस्कृति और परंपरा का विस्तार अब सात समंदर पार भी अपनी जड़ें जमा रहा है। इसी की एक अनुपम मिसाल लंदन के ब्रिस्टल में देखने को मिली, जहां बिहार के रक्सौल की बेटी, शीला गुप्ता ने अपने परिवार और अन्य भारतीय अप्रवासियों के साथ मिलकर पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा मनाई। पिछले लगभग पंद्रह वर्षों से लंदन में रहने वाले करीब दस भारतीय परिवार (जिनमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश मूल के लोग शामिल हैं) इस महापर्व को एक साथ मनाते आ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि भारतीय diaspora (प्रवासी समुदाय) अपनी जड़ों को कितना महत्व देता है।

शीला गुप्ता, जो लंदन के ब्रिस्टल में अपने छोटे बेटे रमन कुमार (एयरबस कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर) और बहू मिनी कुमारी (साइंटिस्ट) के साथ रहती हैं, बिहार की समृद्ध विरासत और परंपरा को विदेश की धरती पर भी जीवंत बनाए हुए हैं। वह न सिर्फ इस संस्कृति को अपनी अगली पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं, बल्कि अपनी मातृभूमि से भावनात्मक रूप से भी जुड़ी हुई हैं। वह लगातार बिहार आती-जाती रहती हैं।

मातृभूमि के लिए छठी माई से मांगी ‘गुड गवर्नेंस’
छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि मातृभूमि और समाज के प्रति अप्रवासी भारतीयों के दायित्व की अभिव्यक्ति भी है। मंगलवार को सूर्य को अर्घ्य देने के उपरांत, शीला गुप्ता ने बिहार के लिए एक विशेष प्रार्थना की। उन्होंने छठी माई से आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि बिहार में गुड गवर्नेंस वाली आइडियल और प्रोग्रेसिव गवर्नमेंट की स्थापना हो, ताकि राज्य विकास की नई ऊँचाइयों को छू सके।
समाज को संदेश: ‘जमकर मतदान करें’
पर्व के समापन पर, शीला गुप्ता ने भारत में रह रहे अपने परिजनों और समस्त बिहारी समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने अपने रक्सौल निवासी पिता भरत प्रसाद गुप्त(अध्यक्ष संभावना संस्था), भाई मदन प्रसाद, प्रोफेसर रजनीश गुप्ता आदि को छठ पूजा की शुभकामनाएं देते हुए उनसे लोकतंत्र के महापर्व में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

उन्होंने vor से कहा, “हम विदेश में रहकर भी बिहार को नहीं भूले हैं, क्योंकि बिहार हमारी पहचान है। हमने यहां छठी माई से यही प्रार्थना की है कि बिहार में एक ऐसी सरकार आए जो राज्य को प्रगति के पथ पर ले जाए। मेरी समस्त बिहारी भाई-बहनों से अपील है कि आप लोग अपने और अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, बिहार और बिहारियों के भविष्य के लिए जमकर मतदान करिए।”
रक्सौल के बुद्धिजीवियों का मानना है कि शीला गुप्ता का यह प्रयास न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का एक उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि प्रवासी भारतीय विश्व भर में फैले होने के बावजूद भी अपनी जन्मभूमि की बेहतरी के प्रति कितने चिंतित और जागरूक हैं। यह खबर पूरी दुनिया के प्रवासी समुदायों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने और अपने देश के विकास में योगदान देने का एक प्रबल संदेश देती है।
