
*वीरगंज में भी त्राहि त्राहि की स्थिति,नेपाल सरकार,जन प्रतिनिधि, फैक्ट्री संचालकों को कोसते हुए लानत भेज रहे रक्सौल -वीरगंज के लोग!
*विद्यान सभा चुनाव के दौरान नदी के हालात पर जन चिंता के बावजूद सुधि नहीं लेने के कारण प्रत्याशियों के खिलाफ भी गहरा जनाक्रोश!
रक्सौल।( Vor desk)।कार्तिकी छठ पर्व पर भी सरिसवा नदी काली रह गई।पूर्वी चंपारण प्रशासन के अनुरोध और वीरगंज प्रशासन की पहल पर यह नदी आंशिक रूप से साफ हुई थी,और एक दो दिन पहले साफ पानी नदी में दिखने लगा था।एकाएक सोमवार को इस नदी में काफी काला और बदबूदार जल प्रवाहित होने लगा,जिसके बाद से क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश और नाराज़गी दिख रही है। नेपाल की ओर से स्वच्छ जल प्रवाहित नही होने की वजह से लोगो की चिंता बढ़ गई है कि छठ कैसे होगा?काफी लोग सूर्य मंदिर और छतों पर छठ मनाने का विकल्प चुनने को विवश हो गए हैं। घाट पर छठ पूजा का अस्तित्व ही खतरे में आ गया है।

इन दिनों विधान सभा चुनाव की कैमपेनिंग चल रही है।इसमें सरिसवा नदी की प्रदूषण मुक्ति की मांग बड़ा मुद्दा बना हुआ है,क्योंकि,यह मांग दो दशक से ज्यादा समय से हो रही है,लेकिन,आज तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।यहां केंद्र सरकार के नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की घोषणा जनवरी 2024 में हुई,लेकिन,इस दिशा में धरातल पर कोई सुगबुगाहट नही दिख रही है।ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे है कि क्या हुआ तेरा वादा,वो, कसम वो इरादा..,!
बताते चले कि हर बार दो तीन दिन पहले से ही नेपाली फैक्ट्रियों पर कड़ाई होती थी।जिससे कूड़ा,कचरा,रसायन प्रवाहित करने की प्रक्रिया बन्द हो जाती थी।लेकिन,दुर्भाग्य से इस बार ऐसा नही हुआ।जबकि, हर बार की तरह इस बार भी जिला प्रशासन और रक्सौल नगर परिषद ने वीरगंज स्थित महावाणिज्य दूतावास के जरिये नेपाली प्रशासन को पत्र लिख कर छठ के मद्देनजर गंदे जल का प्रवाह रोकने का अनुरोध किया था।पिछली बार चैती छठ पर यह नदी कुछ दिनों के लिए साफ हुई ,फिर स्थिति यथावत हो गई।
नदी में स्वच्छ जल प्रवाहित नही होने से अब प्रदूषित जल में ही छठ व्रती अर्ध्य देने को बाध्य होंगे।इसको ले कर नगर पार्षद कुंदन सिंह,घनश्याम प्रसाद ,पूर्व पार्षद शबनम आरा आदि ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियो को आड़े हाथों लेते हुए लापरवाही के लिए कड़ी निंदा की है।

बता दे कि नेपाल के परवानीपुर के राम बाण से निकलने वाली सरिसवा नदी रक्सौल से गुजरते हुए सिकरहना नदी में मिल जाती है।यह नदी काफी प्रदूषित है। डेढ़ दो दशक से इस नदी के प्रदुषण मुक्ति के लिए लगातार आवाज उठती रही है,लेकिन,निदान कोसो दूर दिखता है।सबसे ज्यादा परेशानी छठ व्रतियों को होता है।क्योंकि,सरिसवा नदी किनारे रक्सौल शहर के 80 प्रतिशत से भी ज्यादा छठ व्रती पूजा करते है। यहां की प्रमुख घाट आश्रम रोड छठिया घाट, भखुवा ब्रम्ह स्थान, कस्टम पुल स्थित घाट, बाबा मठिया नागा रोड, त्रिलोकी मंदिर घाट है। सबसे ज्यादा भीड़ आश्रम रोड छठिया घाट, बाबा मठिया छठ घाट पर होती है। यह सभी घाट सरिसवा नदी के किनारे है। नेपाल के कल कारखानों से निकलने वाले जहरीले पानी से सरिसवा नदी दूषित हो जाती है।नदी तट पर रहने वाले लाखो लोग इससे प्रभावित होते हैं।बदबू से रहना दूभर है।यही नही सैकड़ो लोग कैंसर,लिवर सिरोसिस जैसे जानलेवा रोग के कारण मौत के आगोश में जा चुके हैं।अनेकों रोगग्रस्त हैं।जब पर्व आता है रक्सौल की जनता के द्वारा सरिसवा नदी के पानी को स्वच्छ करने की मांग छठ पर्व पर तेज हो जाती है। हर बार इसके लिए प्रशासन पत्र लिखती है,दो चार दिनों के लिए नेपाल से साफ जल प्रवाहित होता है,फिर,वही हाल हो जाता है।सीमा क्षेत्र की जनता नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रही है,ताकि,सरिसवा पूर्व की तरह प्रदूषण मुक्त हो निर्मल बन सके।स्वच्छ रक्सौल संस्था के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि इस दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाया जाए।
