
रक्सौल ।(Vor desk)।लोक आस्था का महापर्व छठ नज़दीक है,बावजूद प्रदूषण नियंत्रण की कारगर पहल नहीं हो सकी है,जिसके खिलाफ जन आक्रोश अब फूटने लगा है। इसी कड़ी में नेपाल के बारा ज़िले के राम वन से निकलकर भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की जीवनरेखा कही जाने वाली सरिसवा नदी के प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए लंबे समय से हो रही अनदेखी से भड़के स्थानीय निवासियों ने आज शुक्रवार को वीरगंज महानगरपालिका–32, चोर्नी पर्सा स्थित नेपाल पेट्रो ल्युब इन्डस्ट्रिज प्रा.लि. के अधिकारियों को सबक सिखाया। मोबिल फेंक दिया और मुंह पर कालिख पोतते हुए खूब हंगामा किया।बात इतनी बढ़ गई कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
क्या है पूरा मामला
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नेपाल पेट्रो ल्युब इन्डस्ट्रिज प्रा.लि., जो ‘म्याक्सोल ल्युब्रिकेन्ट’ का उत्पादन करती है, अपने उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल हुए रासायनिक कचरे को सीधे पास की नदी में मिला रही है। इस ज़हरीले डिस्चार्ज के कारण नदी का पानी अत्यधिक प्रदूषित, काला और दुर्गंधित हो चुका है।
वीरगंज और सीमावर्ती रक्सौल के लिए यह नदी केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि छठ पूजा जैसे महापर्व के लिए प्रमुख घाट है। प्रदूषित जल के कारण छठ व्रतियों और स्थानीय बासिंदों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
सात दिनों के प्रदर्शन के बाद हुआ हंगामा:
स्थानीय लोगों के अनुसार, वे एक सप्ताह से अधिक समय से कंपनी के प्रदूषण के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन जब उनकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो आज शुक्रवार को चोर्नी के करीब 30 से 40 स्थानीय निवासियों का एक समूह आक्रोशित होकर कंपनी परिसर में घुस गया।
विवाद और हंगामे के दौरान, इन आक्रोशित लोगों ने कंपनी के इंचार्ज काशी नाथ तिवारी सहित अन्य ज़िम्मेदार अधिकारियों को निशाना बनाया और प्रदूषण फैलाने के विरोध में उनके चेहरे पर कालिख पोत दी, मोबिल फेंका।
प्रशासन की कार्रवाई और लोगों की मांग:
घटना की सूचना मिलते ही परसा जिला पुलिस कार्यालय से पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने घटना की आगे की जाँच शुरू कर दी है।
उधर, आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कंपनी के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और दूषित पानी फेंकने की गतिविधि को तुरंत रोका जाए। उनका कहना है कि छठ पर्व के समय इस तरह का प्रदूषण धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों पर गहरा आघात है।
बता दे कि नेपाल के वीरगंज पथलैया औद्योगिक कॉरिडोर में प्रदूषण की समस्या ढाई तीन दशक से कायम है।लगातार आंदोलन भी हो रहा है।परसा जिला प्रशासन और वीरगंज महानगर पालिका लगातार करवाई,जुर्माना और फैक्ट्री गेट पर कूड़ा गिराने जैसे कदम उठा चुकी है,बावजूद,अपेक्षित सुधार नहीं है।पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था व स्वास्थ्य चिंताओं के बाद भड़के जनाक्रोश से फैक्ट्री संचालक अब सकते में है और खलबली मची हुई है।
