
रक्सौल।बिहार।(Vor desk)। बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के मद्देनजर नरकटिया विधानसभा क्षेत्र का चुनावी परिदृश्य अब लगभग स्पष्ट हो गया है। मंगलवार को नामांकन पत्रों की गहन समीक्षा के बाद, कागजात में कमी पाए जाने पर एक-दो नहीं बल्कि आठ प्रत्याशियों का नामांकन रद्द कर दिया गया है, जिससे चुनावी मैदान सिमट गया है। नरकटिया विधानसभा की निर्वाची पदाधिकारी सह भूमि सुधार उप समाहर्ता रश्मि सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति ने पुष्टि की है। इन आठ उम्मीदवारों के चुनावी सपने कागजी बाधाओं के कारण टूट गए।
जिन प्रमुख पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों का नोमिनेशन अस्वीकृत हुआ है, उनमें ऑल इंडिया मजलीस-ए-इत्तेहादुल मुस्लेमिन पार्टी के मो. शमिमुल हक, बहुजन समाज पार्टी के मंजर नसीम सिद्दकी, आम आदमी पार्टी के ईश्वर चंद्र त्रिपाठी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के मनीष कुमार शामिल हैं। इसके अलावा, सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के संजय राय,जन शक्ति जनता दल के मोहम्मद तौसीफुर रहमान, दो निर्दलीय प्रत्याशियों भरोस सिंह और डब्लू सिंह का आवेदन भी रद्द हुआ है।
मुख्य मुकाबला हुआ त्रिकोणीय
नामांकन स्वीकृत होने के बाद, नरकटिया की लड़ाई अब दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। कुल सात उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकृत हुए हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला राजद के डॉ. शमीम अहमद (पूर्व मंत्री) को लेकर केंद्रित हो गया है। उन्हें टक्कर देने के लिए जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के विशाल कुमार और चुनावी राजनीति में नई एंट्री कर रही जन सुराज पार्टी के लाल बाबू प्रसाद पूरी ताकत से मैदान में उतर चुके हैं।
इन तीन प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा, चार निर्दलीय प्रत्याशी— मो. हारून रसीद, शमीम देवान, उमर फारूख और वशिष्ठ प्रसाद—भी अपनी किस्मत आजमाएंगे, जिससे समीकरण और भी पेचीदा हो सकते हैं।
चुनावी तिथियाँ
अब सभी की निगाहें आगामी महत्वपूर्ण तिथियों पर टिकी हैं। चुनावी समर से हटने का अंतिम मौका 23 अक्टूबर को है, जब नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद, नरकटिया की जनता 11 नवंबर को अपना नया प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान करेगी और चुनावी नतीजों का इंतजार 14 नवंबर को खत्म होगा।
इस बार का नरकटिया चुनाव, जहां एक तरफ दिग्गज पूर्व मंत्री अपनी सीट बचाने का प्रयास करेंगे, वहीं जदयू और जन सुराज के मजबूत दावेदार उन्हें कड़ी चुनौती देने को तैयार हैं। कागजात में कमी के कारण आठ प्रत्याशियों का बाहर होना बताता है कि इस बार चुनाव आयोग की सख्ती जारी है।
