Tuesday, March 10

पुरानी जमीन, नई उड़ान: दिग्गज नेता साबिर अली की जेडीयू में वापसी, अमौर से करेंगे एआईएमआईएम विधायक से मुकाबला

पटना/रक्सौल।(Vor desk)।बिहार की राजनीति में एक बड़े उलटफेर में पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली ने शनिवार को जनता दल (यूनाइटेड) का दामन थाम लिया है। रक्सौल के डुमरिया के मूल निवासी और एक समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे साबिर अली की यह वापसी उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो उन्हें उनकी पुरानी पार्टी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन में अलग भूमिका में खड़ा किया है।
किशनगंज संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अमौर विधानसभा सीट से साबिर अली अब जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। इस चुनाव को लेकर बिहार के सीमांचल क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि साबिर अली का सीधा मुकाबला एआईएमआईएम (AIMIM) के कद्दावर सीटिंग विधायक अख्तरूल ईमान से होगा। यह टक्कर न केवल दो बड़े नेताओं के बीच होगी, बल्कि यह जेडीयू के लिए मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में एआईएमआईएम की बढ़ती पकड़ को चुनौती देने का एक बड़ा मौका भी होगा।
साबिर अली का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वह पहले लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर राज्यसभा सदस्य रहे, फिर जनता दल (यूनाइटेड) के करीब आए और 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे। विवादों के चलते उनकी भाजपा सदस्यता को कुछ समय के लिए ‘होल्ड’ भी किया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी में वापसी की और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में महत्वपूर्ण पद संभाला। उनकी यह पृष्ठभूमि उन्हें एक ऐसे तेज-तर्रार नेता के रूप में स्थापित करती है जो बिहार की राजनीति की गहरी समझ रखता है और विभिन्न राजनीतिक ध्रुवों के साथ काम करने का अनुभव रखता है।
जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल होते ही, साबिर अली ने बड़े आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन बिहार में भारी बहुमत से सरकार बनाएगा। उन्होंने महागठबंधन और ओवैसी जैसे दलों के बिहार से “सफाया” होने की बात कहकर चुनाव को लेकर अपनी पार्टी के मजबूत इरादों को दर्शाया।
साबिर अली की जेडीयू में वापसी और अमौर से उनका चुनाव लड़ना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि एनडीए गठबंधन सीमांचल क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोटों को साधने और एआईएमआईएम की राजनीतिक पैठ को कमजोर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्सौल के ‘लाल’ की यह नई राजनीतिक पारी, बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों को और भी रोमांचक बना सकती है।

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