
रक्सौल।पूर्वी चंपारण।(Vor desk)।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रक्सौल सीट सिर्फ दलबदल नहीं, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए एक निर्णायक मोड़ के साथ ही एक युवा चेहरे के मैदान में उतर कर दिग्गजों के बीच घमासान की कमान संभालने से चर्चा में आ गई है। कांग्रेस द्वारा आखिरी क्षण में टिकट काटे जाने के बाद साफ सुथरी छवि वाले संघर्ष शील युवा और शिक्षित डॉ. गौतम कुमार ने सीधे बसपा का हाथ थाम लिया है। उन्हें तत्काल पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया गया और सिंबल भी थमा दिया गया है, जिसने सीमांचल की इस सीट पर अचानक हाथी की दमदार उपस्थिति दर्ज करा दी है।
रक्सौल अब केवल भाजपा, कांग्रेस और जन सुराज के दिग्गजों के बीच का युद्ध नहीं रहा। यह सीट अब डॉ. गौतम कुमार के जरिए एक युवा नेतृत्व को मौका देने और बिहार की राजनीति में बसपा को मजबूत करने का संकेत दे रही है। रक्सौल से पूर्व में वर्ष 2015में निर्दलीय चुनाव लड़ चुके और कांग्रेस में रहकर पश्चिम चंपारण लोकसभा सीट से दावेदारी करने वाले डॉ. गौतम कुमार को पूरा भरोसा था कि कांग्रेस उन्हें विधानसभा का टिकट देगी, लेकिन पार्टी ने जदयू से आए पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद को प्राथमिकता दी।
इस ‘अपमान’ को अवसर में बदलते हुए, वैश्य समाज(अति पिछड़े कानू जाति) से आने वाले डॉ. गौतम कुमार ने बसपा के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।शुक्रवार को पटना बसपा कार्यालय में डॉक्टर गौतम कुमार को बसपा का सिंबल प्रदेश प्रभारी लालजी मेधांकर ने ई. रामजी गौतम, प्रदेश अध्यक्ष शंकर महतो,कार्यालय प्रभारी गौतम खरवार, प्रदेश महासचिव राजेश राम, चंदकिशोर पाल, जिलाध्यक्ष मथुरा राम की मौजूदगी में प्रदान किया।वह जल्द ही रक्सौल विधानसभा क्षेत्र से नामजदगी का परचा दाखिल करेंगे।
दूसरी ओर, मैदान में पहले से ही दिग्गज डटे हुए हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक प्रमोद सिन्हा को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं, जन सुराज पार्टी ने जनता दल के शीर्ष पदों पर रह चुके भुवन पटेल को मैदान में उतारा है, जिन्होंने शुक्रवार को अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
यह सीट अब बिहार में राजनीतिक दलों की टिकट वितरण की रणनीति पर सवाल उठा रही है, जहां एक युवा और मेहनती चेहरा कांग्रेस की उपेक्षा का शिकार हुआ और उसे तीसरे विकल्प (बसपा) ने हाथोंहाथ लिया। डॉ. गौतम कुमार का यह कदम और बसपा का उन पर भरोसा, यह दिखाता है कि रक्सौल का यह चुनाव अब केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की भावी राजनीति में युवा चेहरों के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है। यह सीट निर्णायक रूप से राज्य की सबसे चर्चित ‘हॉट सीट’ बन चुकी है।
