
रक्सौल (vor desk)।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच, चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी करके सियासी हलचल तेज कर दी है। इस सूची में सबसे महत्वपूर्ण नाम रक्सौल विधानसभा सीट से पूर्व जदयू नेता कपिल देव प्रसाद उर्फ भुवन पटेल का है। भुवन पटेल का जन सुराज के टिकट पर मैदान में उतरना रक्सौल के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है।
कपिल देव प्रसाद उर्फ भुवन पटेल का राजनीतिक करियर लगभग 27 साल पुराना है। भेलाही पंचायत से मुखिया रह चुके पटेल ने अपने सफर की शुरुआत चम्पारण विकास पार्टी से की थी, जिसके बाद वे नीतीश कुमार के साथ समता पार्टी और फिर जनता दल यू (JDU) में शामिल हुए। JDU में उन्होंने जिलाध्यक्ष और राज्य कार्यकारिणी सदस्य जैसे अहम दायित्व संभाले। हालांकि, पार्टी की लंबे समय तक सेवा करने के बावजूद हुई उपेक्षा से नाराज होकर उन्होंने JDU से त्यागपत्र दे दिया और प्रशांत किशोर के साथ जुड़ गए।
NDA और लव-कुश समीकरण पर सीधा असर
भुवन पटेल को टिकट दिए जाने के फैसले से यह लगभग तय माना जा रहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को रक्सौल सीट पर बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।यहां जनता दल यू से भाजपा में शामिल प्रमोद सिन्हा सीटिंग एम एल ए हैं।
पटेल मूल रूप से JDU के कद्दावर नेता रहे हैं और उनका यह बागी तेवर सीधे तौर पर नीतीश कुमार के वोट बैंक में सेंध लगाएगा।
बिहार की राजनीति में JDU की पहचान मुख्यतः कुर्मी और कोइरी (कुशवाहा) समुदायों के ‘लव-कुश’ समीकरण से होती है। भुवन पटेल का मजबूत जनाधार और JDU में उनका पुराना अनुभव, इस समीकरण के वोटों को NDA से काटकर जन सुराज की तरफ मोड़ सकता है। JDU से आए भुवन पटेल न सिर्फ JDU के पारंपरिक वोटरों को प्रभावित करेंगे, बल्कि उनकी स्थानीय पहचान और 27 साल की सक्रियता, रक्सौल के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में असर डाल सकती है। इसका सीधा मतलब है कि NDA का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर अब त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले की संभावना बन गई है।
जन सुराज में असंतोष: भीतरखाने की चुनौती
जहां प्रशांत किशोर ने एक अनुभवी और बागी नेता पर दांव खेलकर विरोधी खेमे को चुनौती दी है, वहीं इस घोषणा ने जन सुराज के भीतर भी असंतोष पैदा कर दिया है। टिकट की मजबूत दावेदार मानी जा रहीं जन सुराज नेत्री पूर्णिमा भारती और शशांक शेखर इस फैसले से मायूस दिख रहे हैं। पूर्णिमा भारती ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अपने समर्थकों और समाज के साथ बैठक कर रही हैं, जिसके बाद ही वह अपना अगला कदम तय करेंगी। यह आंतरिक असंतोष जन सुराज के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि यदि ये असंतुष्ट नेता कोई कड़ा फैसला लेते हैं, तो उसका असर भी भुवन पटेल की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, कपिल देव प्रसाद उर्फ भुवन पटेल की उम्मीदवारी ने रक्सौल विधानसभा चुनाव 2025 को एक दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां उनका JDU से विद्रोह NDA के लिए खतरे की घंटी है, और यह लव-कुश समीकरण को भी प्रभावित करता दिख रहा है।
