
रक्सौल।(Vor desk)।नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई भयंकर बारिश ने सीमावर्ती भारतीय जिले चंपारण (पूर्वी और पश्चिमी चंपारण) में हाहाकार मचा दिया है, जहां उफनती नदियों ने बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। प्रकृति के इस दोहरे वार से दोनों तरफ के लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन इस संकट के बीच मानवीय सहयोग और एकजुटता की उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।
नेपाल में हुई मूसलाधार बारिश ने गंडक, बागमती जैसी प्रमुख नदियों को खतरे के निशान से ऊपर ला दिया है। एक और वीरगंज सहित नेपाल के कई सीमावर्ती शहर और गांव बाढ़ की चपेट में है और जन जीवन अस्त व्यस्त हो चुका है।वहीं,नेपाली नदियों का सारा पानी भारत के चंपारण और आस-पास के निचले इलाकों में घुस आया है, जिससे कई गाँव जलमग्न हो गए हैं और लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।

रक्सौल, मोतिहारी और बेतिया जैसे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां सड़कें कीचड़ और पानी से लबालब हैं, वहीं स्थानीय लोग अपनी जान की परवाह न करते हुए एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। तमाम सरकारी दावों के बावजूद, जब लोगों को त्वरित सरकारी सहायता नहीं मिल पाई, तो उन्होंने खुद ही राहत कार्य शुरू किए। कहीं युवक पानी की तेज धारा में बहते बुजुर्गों को बचा रहे हैं, तो कहीं महिलाएं अपने परिवार के आवश्यक सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में एक-दूसरे का हाथ बंटा रही हैं।

रक्सौल शहर के कौड़ीहार चौक अंतर्गत कॉलेज रोड जैसी जगहों पर, जहां भारी बारिश के कारण पकड़ी का पुराना पेड़ गिर गया था और रास्ता अवरुद्ध हो गया था, वहाँ नगर परिषद की टीम और स्थानीय पार्षद सोनू गुप्ता ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मार्ग को साफ कराया, जिससे यातायात सामान्य हो सका। यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में भले ही विपदा बड़ी हो, लेकिन सामुदायिक प्रयास और तत्परता से मुश्किलों पर काबू पाया जा सकता है।

इधर लगातार बारिश से नेपाल की प्रमुख नदियों से जुड़ी सहायक नदियां तिलावे, धूतहा ,गाद,सरिसवा, बंगरी भी उफान पर हैं।प्रखंड के भेलाही,सिसवा, पंटोका पंचायत सहित विभिन्न सीमावर्ती पंचायतों के विभिन्न गांव में बाढ़ का पानी पसरा हुआ है।वहीं,नगर परिषद क्षेत्र के तुमरियाटोला, डंकन रोड, सुंदरपुर, अहिरवाटोला और त्रिलोकी नगर जैसे कई क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ का पानी घरों में घुसने से लोग अपना आवश्यक सामान लेकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।स्थानीय निवासी श्याम लामा ने बताया कि, सरिसवा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है।अन्य नदियों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। एक स्थानीय महिला नीलम देवी ने जानकारी दी कि उनके घर में पानी घुस गया है, जिसके कारण उन्हें परिवार सहित सुरक्षित स्थान की तलाश में घर छोड़ना पड़ा।उन्होंने आरोप किया कि अभी तक बाढ़ प्रभावितों को किसी प्रकार की सरकारी सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इधर,आंधी तूफान और भारी बारिश से स्थिति विपरीत हो गई है।शहर के कई सड़क,गली मोहल्ले कीचड़ ,जल जमाव से नरकीय स्थिति में हैं।
बाढ़ से फसलें नष्ट हुई हैं और संपर्क टूट गया है, लेकिन लोगों का साहस नहीं टूटा है। इस आपदा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत और नेपाल, जो सदियों से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, प्राकृतिक विपदा में भी एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। यह कठिन समय जरूर है, पर जनता का परस्पर सहयोग और जीने का संकल्प ही इस भयंकर जलप्रलय से बाहर निकलने की सबसे बड़ी आशा है।
