Saturday, March 7

रक्सौल में एक्टू के तत्वाधान में सफाई मजदूर सम्मान सामाजिक सुरक्षा अधिकार सम्मेलन आयोजित,मजदूर नेताओं ने लगाया सरकार पर सौतेले व्यवहार आरोप!

रक्सौल।(Vor desk)।बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी संघ (ऐक्टू) रक्सौल के द्वारा रविवार को सफाई मजदूर सम्मान सामाजिक सुरक्षा अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया।इस सम्मेलन में नगर परिषद के सभी सफाई कर्मियों, चालकों एवं मजदूरो की महत्वपूर्ण सहभागिता रही।सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय सचिव ए ऐक्टू सह महासंघ अध्यक्ष कामरेड आर.एन. ठाकुर ने की, जबकि संचालन महासचिव चंद्रशेखर कुमार ने किया।शहर के हजारीमल हाई स्कूल में आयोजन सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू) लंबे समय से सफाई मजदूरों की सेवा नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, दैनिक मानदेय में बढ़ोतरी, आउटसोर्स कर्मियों की सेवा आयु 60 वर्ष तक निर्धारित करने, निजी संचिका खोलने, सेवा अभिलेख बनाने, एसीपी का लाभ देने, कार्य के दौरान मृत्यु पर आश्रितों को अनुकंपा पर नौकरी, 10 लाख मुआवजा तथा आश्रितों को आजीवन पेंशन जैसी मांगों को लेकर संघर्षरत है, लेकिन राज्य सरकार ने इन जायज मांगों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। वक्ताओं ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि रसोईया, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका तथा अन्य संविदा कर्मियों का मानदेय व प्रोत्साहन भत्ता तो बढ़ाया गया है परंतु नगर निकायों के सफाई मजदूरों को इससे वंचित रखा गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

कन्वेंशन की अध्यक्षता कर रहे कॉमरेड आर एन ठाकुर  ने साफ साफ ठेका प्रथा (आउटसोर्सिंग) को एक कानूनी अपराध बताते हुए तत्काल इसे समाप्त करने की मांग की।कहा कि देश का सफाई मजदूर ₹35,000 (पैंतीस हजार रुपये) मासिक न्यूनतम वेतन की मांग कर रहा है, ताकि वह अपने परिवार का सम्मानजनक भरण-पोषण कर सके। उन्हें नियम से सारी सुविधाओं के साथ समान काम, समान वेतन मिलना चाहिए।

अपने संबोधन में आल इंडिया म्युनिस्पल एंड सैनिटेशन वर्क्स फेडरेशन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कॉमरेड चंद्र किशोर प्रसाद ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने 20 वर्षों से अधिक समय से इन मजदूरों को गुमराह किया है, जिसके कारण देश के लाखों मजदूर आज गुलामों जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं और सेवा-निवृत्ति के बाद भूखमरी के कगार पर पहुँच जाते हैं।

राज्य कार्यकारिणी सदस्य श्याम बाबू कुमार ने कहा कि सरकार दलित-महादलितों के उत्थान का प्रचार करती है, लेकिन नगर निकायों में कार्यरत 90 प्रतिशत दलित-महादलित सफाई कर्मियों को सुविधाओं से वंचित रखना उनकी कथनी-करनी के फर्क को उजागर करता है। महासचिव चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि भाजपा सरकार दलित विरोधी और सफाई मजदूर विरोधी हैं। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम एक्ट के तहत मिले अधिकारों को छीनकर मजदूरों को न तो सेवा-निवृत्ति का लाभ दिया जाता है और न ही जांच या सुनवाई का कोई अधिकार मिलता है। उन्होंने  बिना शर्त स्थायी सेवा और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस ) की बहाली के साथ है मृतक आश्रितों के लिए दया के आधार पर नौकरी देने की मांग को दोहराया।

बैठक में प्रेम मलिक, मीना देवी, सीता देवी,सविता देवी, शांति देवी, इंदु देवी, चंआलम, सोनेलाल मालिक, जितेंद्र मलिक समेत दर्जनों महिला व पुरुष सफाई कर्मी मौजूद रहे।

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