
रक्सौल/सिवान (vor desk)।भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में पहले से जांच एजेंसियों के रडार पर रहे सीवान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने यह कार्रवाई की है।
अनुभूति श्रीवास्तव रक्सौल के कार्यपालक पदाधिकारी रह चुके थे और उनका कार्यकाल यहां काफी विवादास्पद रहा था।उनके खिलाफ उप सभापति पुष्पा देवी और समाजिक कार्यकर्ता नुरुल्लाह खान सहित कई लोगों ने शिकायतें की थी।इन्हीं के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितता और विभागीय नियम विरूद्ध कार्य को ले कर सभापति धुरपति देवी को नगर विकास विभाग ने पदमुक्त करने का आदेश जारी किया था।वैसे अनुभूति श्रीवास्तव के खिलाफ डुमरांव, भभुआ, हाजीपुर में कार्यपालक पदाधिकारी रहने के दौरान करोड़ों के गबन का आरोप रहा है।
बता दे कि हाल ही में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने अनुभूति श्रीवास्तव के सिवान सहित चार ठिकानों पर छापेमारी की थी।जिसमें उनकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति के दस्तावेज और साक्ष्य मिले थे। ईओयू ने 18 अगस्त 2025 को उनके खिलाफ आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-20/2025 दर्ज किया था। इस प्राथमिकी में धारा-49/61 बीएनएस 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) सहपठित 13(1) बी/12 के तहत मामला दर्ज किया गया।
19 अगस्त को हुई थी छापेमारी
19 अगस्त 2025 को बिहार से यूपी तक उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी में चार अलग-अलग स्थानों से संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए थे। छापेमारी के बाद भी अनुभूति श्रीवास्तव द्वारा नगर परिषद कार्यालय में नियमित रूप से कार्य करना और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कामों को अंजाम देना सवालों के घेरे में था।
इसके बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया। विभागीय आदेश के अनुसार, प्रथम दृष्टया आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। इसे बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-3 (i), (ii) और (iii) का उल्लंघन माना गया है।
कार्रवाई से विभाग में चर्चा का माहौल
इसी आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1) के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना में रहेगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक वे किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगी।
इस कार्रवाई के बाद सीवान और रक्सौल नगर परिषद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
