
रक्सौल।(Vor desk)।’स्वस्थ नारी, स्वस्थ भारत’ अभियान के तहत रक्सौल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित शिविर पूरी तरह से कुप्रबंधन और आपसी मनमुटाव का शिकार रहा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच तालमेल की भारी कमी दिखी, जिसके कारण अनुमंडल अस्पताल और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) की अंदरूनी खींचतान मंच पर खुलकर सामने आ गई।
अधिकारियों में टकराव और मंच पर खींचतान के बीच
कार्यक्रम की शुरुआत से ही अव्यवस्था हावी रही। रक्सौल पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन मंच से अलग-थलग बैठे दिखे, वहीं, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. शरत चंद्र शर्मा जैसे वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को मंच पर बैठने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। मंच पर एक पक्षिय दबदबा दिखाई दिया और मंच संचालन पर भी सवाल उठे।यहां तक कि अतिथियों के नाम पुकारने और उन्हें सम्मान देने के मामले में अस्त व्यस्त स्थिति देखी गई। उद्घाटन सत्र के बाद ही माहौल में अफरातफरी मच गई। जैसे ही जनप्रतिनिधि गए, कार्यक्रम में आई महिलाएं और अन्य लोग भी खिसक लिए, जिससे आयोजन की सफलता पर प्रश्नचिन्ह लग गया।
आशा कार्यकर्ताओं का जोरदार हंगामा
जमीनी स्तर पर काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं और आशा फेसिलेटरों ने अस्पताल परिसर में जमकर आक्रोश व्यक्त किया।

अपमान का आरोप: आशा फेसिलेटर गायत्री देवी सहित दर्जनों आशा कार्यकर्ताओं ने आक्रोश व्यक्त किया कि उन्हें सुबह बुलाकर सिर्फ कुर्सियाँ भरने के लिए इस्तेमाल किया गया, लेकिन मंच पर उनके बारे में कोई बात नहीं की गई।
मंच पर स्थान से वंचित: कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वे सरकार की योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक ले जाती हैं, फिर भी उन्हें या उनके बीसीएम या संघ प्रतिनिधि को मंच पर कोई स्थान या हमें सम्मान नहीं दिया गया।
अल्पाहार में अनदेखी: कार्यक्रम के बाद अल्पाहार वितरण में भी उनकी अनदेखी की गई, जिस पर काफी बवाल हुआ।
जनप्रतिनिधियों से निराशा और अभियान की सार्थकता पर सवाल
सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने जब मंच से पूछा कि कितने लोगों के खाते में ₹10,000 आए हैं, तो केवल चार महिलाओं ने हाथ उठाया, जिनमें अस्पताल से ही जुड़ी एक सफाईकर्मी भी शामिल थीं। इस दौरान, जनप्रतिनिधियों ने ज्यादातर कुर्सियाँ भरने वाली आशा कार्यकर्ताओं के बारे में कोई बात नहीं की, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ गई।
इस शिविर में उपाधीक्षक डा स्वाति सपन की तारीफ करते हुए सांसद डा संजय जायसवाल ने कहा कि कम उम्र में बड़ी जिम्मेवारी को बेहतर ढंग से निभाएं और किसी से डरने की जरूरत नहीं है।
हालाकि, डा. संजय जायसवाल ने मंच से यह कहते हुए माफी मांगी थी कि किसी का नाम छूट गया हो तो बुरा नहीं माने।सभी इस अभियान को सफल बनाए और लाभ लें।
वैसे ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान’ शिविर अपने आयोजन से अधिक अनुमंडलीय अस्पताल और पीएचसी के बीच के गतिरोध और भयंकर मिस मैनेजमेंट के कारण चर्चा में रहा। एक वरीय भाजपा नेता ने भी अव्यवस्था की बात स्वीकार की और अस्पताल प्रबंधन की ओर से सुधार की जरूरत बताई।उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा कार्यक्रम होता रहा है,लेकिन,ऐसी कुव्यवस्था पहली बार दिखी। कुल मिलाकर, यह आयोजन अपने उद्देश्य को साधने में सफल नहीं रहा,अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया।इस कुव्यवस्था के पीछे राजनीतिक दखल था या विभागीय कमी,यह जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
बताते चले कि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने डा स्वाति सपन अनुमंडल अस्पताल की उपाधीक्षक बनाई गई हैं,जबकि,अपने तीन वर्षों के सफल कार्यकाल के बाद अब उपाधीक्षक डा राजीव रंजन कुमार पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी है,जिनकी पदोन्नति भी विभाग के द्वारा हो गई है।जगह न मिल पाने से अनुमंडल अस्पताल पीएचसी परिसर में ही निर्मित है।
- ।
