
रक्सौल।(Vor desk)।भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने एक नाइजीरियाई नागरिक को हिरासत में लिया है, जिसने अपनी पहचान बदलकर भारत में दोबारा प्रवेश करने की कोशिश की थी। यह घटना दिखाती है कि भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था काफी चौकस है,जहाँ छोटी से छोटी चूक भी पकड़ी जा रही है।लगातार कई विदेशी नागरिक बोर्डर पर पकड़े जा चुके हैं।
ताजा मामले में हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान हेनरी चिगोज़ी ओमेके के रूप में हुई है, जो पहले मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था। वह 16 फरवरी, 2024 को अपनी वीज़ा अवधि समाप्त होने से पहले ही भारत से लौट गया था। लेकिन कुछ समय बाद, उसने अपनी नागरिकता बदलकर ‘रिपब्लिक ऑफ कोटे डी आइवर’ का पासपोर्ट बनवा लिया और अपना नाम एडजोबा गिल्बर्ट(पुरुष) रख लिया।फर्जी विवरण में उसने जन्म तिथि 26फरवरी 1983,पासपोर्ट नंबर 17 एएल 19840 (वैधता 20फरवरी2024 से20फरवरी2029तक )और वीजा संख्या वी एन 1651941 (बी 1 वीजा,दोहरी प्रविष्टि )इस नई पहचान के साथ उसने वीरगंज रक्सौल के रास्ते भारत में फिर से घुसने का प्रयास किया, लेकिन रक्सौल बॉर्डर पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के कारण पकड़ा गया। रक्सौल इमिग्रेशन कार्यालय में इंडियन इमिग्रेशन क्लियरेंस के जांच के दौरान फर्जीवाड़ा सामने आया।
इमिग्रेशन अधिकारियों के मुताबिक, एक अन्य व्यक्ति अब्दुलावये कूलिबाली (पुरुष) ने भी इसी पासपोर्ट नंबर (17AL19840) का उपयोग करके 23सितम्बर 2017 को फ्लाइट से दिल्ली एयरपोर्ट पर प्रवेश की कोशिश की थी, लेकिन इमीग्रेशन क्लियरेंस के दौरान उन्हें प्रवेश से इनकार कर दिया गया और निर्वासित (Deport) कर दिया गया था,क्योंकि,वह व्यक्ति भी दूसरे के फर्जी पासपोर्ट पर इंट्री के प्रयास में था।ऐसे में एडजोबा गिल्बर्ट द्वारा लाया गया पासपोर्ट फर्जी हो सकता है क्योंकि एक ही पासपोर्ट नंबर का उपयोग एक से अधिक व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकता है।
उक्त विदेशी भारत में पहली बार 2दिसंबर2023को दिल्ली एयरपोर्ट पर भारत का तीन महीने का मेडिकल वीजा ले कर आया था और 2फरवरी2024 को प्रस्थान कर गया था।मिले विवरण के अनुसार हेनरी का जन्म 27जुलाई1968 को हुआ था,जिसका पासपोर्ट नंबर ए08109849(वैधता9नवंबर22से 8 नवंबर27तक ), वीजा संख्या (वि एल 7359563मेडिकल वीजा जिसकी अवधि 17नवंबर23से 16फरवरी2024) है।
यह गिरफ्तारी सिर्फ एक नाइजीरियाई नागरिक को पकड़ने की घटना नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियों में किस कदर इजाफा हुआ है। हालाकि,भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं।इस बार रक्सौल इमिग्रेशन और एसएसबी की 47वीं बटालियन के जवानों ने यह कार्रवाई की और उनकी सतर्कता ने एक संभावित सुरक्षा जोखिम को टाल दिया। इस पर जांच शुरू हो गई है कि आखिर नाइजीरियाई नगारिक के दुबारा भारत में घुसपैठ के पीछे असली मंशा क्या थी!
तीन दिनों में दूसरी बार इस तरह की घटनाओं से यह भी साफ होता है कि विदेशी नागरिक भारत में प्रवेश के लिए अक्सर फर्जी दस्तावेज़ों का सहारा लेते हैं।इससे पहले 22सितंबर को सूडानी नागरिक मूर्तदा कमल हामिद मोहम्मद को भी फर्जी दस्तावेजों के साथ यहां पकड़ा गया था ।
फिलहाल, रक्सौल बोर्डर पर पकड़े गए इस नाइजीरियन नागरिक को रक्सौल इमिग्रेशन ने एसएसबी/47 बटालियन रक्सौल की सुरक्षा में उचित एवं अग्रिम कार्यवाही करने हेतु सौंप दिया ,जिसके बाद हरैया थाना में प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच और करवाई शुरू कर दी गई है।
