
रक्सौल ।(Vor desk)। रक्सौल सहित सीमा क्षेत्र में रक्षाबंधन का पर्व पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया।यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।इस अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख-समृद्धि की कामना की, जबकि भाइयों ने बहनों को उपहार स्वरूप भेंट दी और जीवनभर सुरक्षा का वचन दिया। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरु अपने शिष्य को, ब्राह्मण अपने यजमान को और प्रजा अपने राजा को भी रक्षा सूत्र बांधते हैं।साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के संदेश को ध्यान में रखते हुए वृक्षों पर भी रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें सुरक्षित रखने का संकल्प लिया गया।
पंडित अजय उपाध्याय ने बताया कि रक्षाबंधन का त्योहार केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक ही नहीं, बल्कि यह व्यक्ति, परिवार, समाज एवं राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का आह्वान करता है।यह पर्व आत्मबोध और आत्मज्ञान का दिन भी है। पारंपरिक रूप से यह उत्सव सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। शनिवार की सुबह भाइयों ने स्नान आदि कर बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाया और बदले में आशीर्वाद के साथ उपहार दिए।बहनें एक सप्ताह पूर्व से ही इस पर्व को लेकर उत्साहित थीं।इस बार बाजार में राखियां ₹10 से लेकर ₹200 तक बिकीं, वहीं सोने-चांदी की राखियां भी लोगों को खूब आकर्षित करती रहीं।वहीं,
शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की मिठाई दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई। लोग अपनी-अपनी पसंद की मिठाइयां खरीदने में व्यस्त रहे। देर शाम तक कई स्थानों पर मिठाइयों का स्टॉक खत्म हो चुका था, और सुबह भी यही स्थिति बनी रही।
सेल्फी और सोशल मीडिया पर बधाई का दौर
भाई बहन के अटूट प्यार का पर्व सोशल साइट्स पर भी छाया रहा।व्हाट्सएप ग्रुप पर बधाई का दौर एक दिन पहले से ही शुरू हो गया था। फेसबुक व व्हाट्सएप पर बहनों के कलाई पर राखी बंधाने की तस्वीर शेयर कर बहन का आशीर्वाद प्राप्त होने की बात लिख रहे थे।राखी बंधन के बाद भी भाई बहन सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे।(रिपोर्ट:पीके गुप्ता)
