Tuesday, March 10

यूपी की आग से बिहार में धधक, चम्पारण के इस गांव में चप्पे-चप्पे पर ब्राह्मणों को लेकर लिखी ये बात, मचा हंगामा!

रक्सौल।(Vor desk)।यूपी के इटावा में कथा वाचक मुकुट मणि सिंह के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी की गूंज बिहार तक पहुंच चुकी है।नेपाल सीमा से लगे बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर थाना क्षेत्र के टिकुलिया गांव के लोगों ने ब्राह्मणों के पूजा-पाठ पर बैन लगा दिया है। ग्रामीणों ने गांव में बोर्ड और बैनर लगाकर ब्राह्मणों को ऐसा करने से मना किया है। कहा गया है कि जिन्हें वेद ,धर्म और संस्कारों का पूरा ज्ञान होगा,उन्हें ही पूजा करने दिया जाएगा।चेताया गया है कि इसका उल्लंघन करते पकड़े जाने पर परिणाम भुगतना होगा।
मामले की सूचना मिलने के बाद एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर पुलिस बल को गांव में भेजा गया है।पुलिस ने वहां लगे बोर्ड को मिटा कर ‘मेरा भारत महान! ‘लिख दिया है।

रात में लगा बोर्ड,सुबह मचा कोहराम

बता दे कि रात के अंधेरे में की गई इस बोर्ड लगाए जाने के बाद गांव के लोग जब सोमवार की सुबह जगे और इस हरकत को देखा तो जंगल के आग की तरह यह सूचना पूरे गांव में फैली। साथ ही इंटरनेट मीडिया पर आपत्तिजनक पेटिंग की तस्वीरें व वीडियो प्रसारित होने लगी।पूजा पाठ के लिए आने जाने वाले पुजारी,ब्राह्मण गांव जाने से कन्नी काटने लगे।बताया गया है कि टिकुलिया गांव की आबादी में ओबीसी और ईबीसी समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं,लेकिन, आसपास के गांवों में इनकी संख्या अच्छी खासी है।

ब्राह्मणों को पूजा-पाठ करना सख्त मना है

आदापुर प्रखंड के टिकुलिया गांव में प्रवेश करने वाले मार्ग सहित हर बिजली के खंभे और कई बोर्डों पर लिखा गया है “इस गांव में ब्राह्मणों को पूजा-पाठ करना सख्त मना है, पकड़े जाने पर दंड मिलेगा.” यह स्लोगन गांव के प्रवेश द्वार से लेकर अंत तक लगभग हर खंभे पर साफ लिखा गया है। ग्रामीणों का इसको लेकर कहना है कि हमारा विरोध ब्राह्मणों से नहीं है, हमारा विरोध उन ब्राह्मणों से है जो वेद और संस्कृत का सही ज्ञान नहीं रखते।

सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसा किया

ग्रामीणों का कहना है कि हम लोग उन भी का सम्मान करते हैं जो वेद के ज्ञाता हों, चाहे वे किसी भी जाति या धर्म के हों।
जो लोग ब्राह्मण होते हुए भी मांस-मदिरा का सेवन करते हैं और धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करते हैं, उन्हें वे “धार्मिक व्यवसायी” मानते हैं, न कि श्रद्धा का पात्र।वे केवल उन्हीं लोगों को मंच देंगे जिनमें वेद, शास्त्र और आचार का सच्चा पालन हो, चाहे वे किसी भी जाति या वर्ग से हों। यह कदम, जिसे गांव वालों ने जातिगत भेदभाव मिटाने और इटावा जैसी “अभद्र व्यवहार” की घटनाओं को रोकने का प्रयास बताया है।उनका कहना है कि जातिगत पहचान के आधार पर लोगों को पूजा-पाठ से रोकना संविधान विरोधी ही नहीं है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरे में डालता हैं।

गांव पहुंची पुलिस की टीम

वहीं, इस मामले की सूचना मिलने के बाद मोतिहारी से पुलिस टीम यादव बहुल टिकुलिया गांव पहुंचकर कैंप कर रही है। स्थानीय थानाध्यक्ष धर्मवीर चौधरी का कहना है कि बोर्ड हटा दिए गए है।पोल पर जहां जहां मैसेज लिखे गए हैं उसे भी मिटाया जा रहा है। जिसने भी ऐसी हरकत की है, पुलिस उसको तलाश रही है।सूत्रों का कहना है कि इस मामले में एक यूट्यूबर का हाथ होने की बात सामने आई है,जिसकी जांच जारी है।

पुलिस ने संकेत दिया है कि इस तरह के बोर्ड लगाना और सार्वजनिक स्थलों पर इस प्रकार की चेतावनी देना कानून व्यवस्था के लिए खतरा है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। यदि आवश्यक हुआ तो आईटी एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वैसे यह मसला सूबे में चर्चा का विषय बन गया है।एक तरफ इस मामले को धार्मिक पाखंड और जातिगत श्रेष्ठता के खिलाफ एक सशक्त आवाज के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सामाजिक दरार को और गहरा कर सकता है। ग्रामीण ऐसे धार्मिक पेशेवरों को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं जो वेद और शास्त्रों के वास्तविक ज्ञान के बिना केवल अपनी जाति के आधार पर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और कथित तौर पर मांस-मदिरा का सेवन कर धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करते है।
हालाकि,टिकुलिया गांव में इस तरह का सामाजिक विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह ब्राह्मण विरोधी रवैया किसी राजनीतिक साजिश या चुनावी प्रोपेगेंडा का हिस्सा है?

इटावा में क्या हुआ?
इटावा में कथावाचक मुकुट मणि सिंह यादव के साथ बुरा बर्ताव हुआ। उन्हें कथावाचन करने से रोका गया और जाति के नाम पर बेइज्जत किया गया। फिर उनका सिर मुंडवाया गया, पीटा गया। इतना ही नहीं, शुद्धिकरण के नाम पर उन पर महिला का पेशाब छिड़का गया। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि वो ब्राह्मण जाति से नहीं थे। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस घटना का विरोध किया।

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