
रक्सौल।(Vor desk)। इंडो नेपाल बॉर्डर अंतर्गत रक्सौल के सरिसवा नदी पर बने मैत्री पुल के पास बुधवार को हैंड ग्रेनेड बम मिलने के बाद सीमा की सुरक्षा और संवेदनशीलता का मामला गहरा गया।रक्सौल नेपाल का प्रमुख प्रवेश द्वार है,जहां यह बम मिलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।जहां यह बम मिला ,वह लैंड कस्टम से जुड़ा एरिया है।मैत्री पुल पर जहां एसएसबी की टीम चौकसी में बैठती है,ठीक उसी के नीचे नदी क्षेत्र से बम मिलना आशंकाएं उत्पन्न कर रही है।यह जांच जारी है कि हैंड ग्रेनेड किस देश में बना है।कैसे और किसके द्वारा बॉर्डर तक आया और इसे लाने का मकसद क्या था।देश की सुरक्षा नजरों से देखें तो यह गंभीर मामला है और यह समझा जा सकता है कि निशाने पर सुरक्षा एजेंसियां थीं।सीमा पर कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने का मकसद हो सकता है।वैसे भी,ऑपरेशन सिंदूर के बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा संवेदनशीलता काफी बढ़ी हुई है।
बच्चों के नहाने के क्रम में मिला बम, टला बड़ा हादसा
हैंड ग्रेनेड मिलने के बाद बोर्डर के दोनों ओर खलबली मच गई।दोनो ओर की सुरक्षा एंजेसियों के कान खड़े हो गए।बताते हैं कि कुछ स्थानीय बच्चे नदी में स्नान कर रहे थे ,जिन्होंने नदी किनारे एक थैले में संदिग्ध वस्तु देखी,जो बाद में हैंड ग्रेनेड (बम) निकला।
बताते है कि घटना दोपहर करीब बारह बजे की है।नहाने के क्रम में बच्चों ने नदी तट पर पानी के अंदर मिले थैला को खोलकर अंदर देखा तो उसमें रखी सामग्री की संरचना संदिग्ध लगी।पहले तो इसे कबाड़ और खिलौना समझा।एक बच्चा तो पिन खींचने में जुटा ही था,की दूसरे बच्चे ने फिल्मों में देखे बम से तुलना करते हुए इसे रोका और हो हल्ला करते हुए एसएसबी को सूचना दी।यदि बच्चे ने पिन खींच दिया होता तो बड़ी वारदात हो गई होती और हो सकता था कि मैत्री पुल,एसएसबी और कस्टम विस्फोट के शिकार बन गए होते।
बच्चों के शोर के बाद दिल्ली-काठमांडू मार्ग पर चेकिंग में लगे वहां तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान तत्काल मौके पर पहुंचे और थैले को कब्जे में ले लिया। थैले की जांच की गई तो उसमें बम ( हैंड ग्रेनेड) होने की पुष्टि हुई।

इसके बाद आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई। सूचना मिलते ही एसएसबी के प्रभारी कमांडेंट संजय राउत, डिप्टी कमांडेंट नवीन कुमार और सहायक कमांडेंट उत्तम कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दी और कस्टम ऑफिस से सटे सभी इलाकों को सील कर दिया गया।पहले तो यह दावा किया गया कि हैंड ग्रेनेड डिफ्यूज था, लेकिन फिर भी गहन जांच शुरू कर दी गई है।
फिलहाल सुरक्षा कारणों से घटनास्थल की ओर आम नागरिकों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है। हरैया थाने की टीम और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी पहुंचकर आवश्यक जांच में जुट गई है। एसएसबी के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है और देर शाम तक बम निरोधक दस्ता के पहुंच कर बम को नियंत्रण में ले कर आवश्यक कारवाई में जुटी है।टीम ने प्रशिक्षित जवानों और डॉग स्क्वॉड के साथ उक्त क्षेत्र में गहन सर्च ऑपरेशन भी चलाया,ताकि,पता लग सके कि और भी बम वहां मौजूद है या नहीं।आशंका है कि यह ग्रेनेड अकेला नहीं हो सकता और और भी हथियार या विस्फोटक नदी में फेंके गए हो सकते हैं।
प्रारंभिक जांच में संदेह जताया जा रहा है कि किसी आतंकी अथवा अपराधी संगठन ने नेपाल के रास्ते भारत में विस्फोटक पहुंचाने की कोशिश की हो। लेकिन सीमा पर कड़ी निगरानी को देख, शायद ग्रेनेड को नदी में फेंक दिया गया।हालाकि,पूरी तरह से फिलहाल इसका दावा नहीं किया जा सकता कि बम नेपाल की ओर से ही लाया गया था।
अधिकारियों ने बम निरोधक टीम द्वारा बम को डिफ्यूज कर विस्फोट करने की पुष्टि फिलहाल नहीं की है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि बम में इस्तेमाल किए गए केमिकल की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह कितना शक्तिशाली था और किस तरह के विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था।हालाकि,सुरक्षा कारणों से अधिकारी खुल कर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।
फिलहाल यह जांच का विषय है कि यह बम वहां किसने, कब और किस मकसद से रखा था,जिसको ले कर केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया जांच में जुट गई है।सीसीटीवी खंगाला जा रहा है।संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है।
