Friday, April 4

छठ व्रतियों ने अस्तचलगामी सूर्य को दिया अर्ध्य ,छठ गीतों से गुंजित रहा रक्सौल का छठ घाट !

रक्सौल।(vor desk)। सूर्योपासना एवं लोक आस्था के महान पर्व चैती छठ पूजा के तीसरे दिन अस्तचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया।इस दौरान छठ घाटों पर भक्ति भाव के बीच पूजा अर्चना हुई।घाटों पर छठ पूजा के गीत गूंजते रहे।बांस की टोकरी ठेकुआ , फल, मूली, चावल के लड्डू, गन्ना सहित अन्य सामान रखा गया और पानी में खड़े होकर विधिवत तरीके से सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस सूप में मौजूद सामग्री चढ़ाई गई।

शहर के सूर्य मंदिर ,आश्रम रोड, बाबा मठिया ,कोइरिया टोला,कौड़िहार चौक,भकुआ ब्रह्म बाबा,कस्टम चेक पोस्ट घाट ,तुमडिया टोला शिव हनुमान मंदिर आदि घाट पर श्रद्धालुओं की भीड उमड़ पडी।

प्रदूषित रहा सरिसवा नदी,कृत्रिम घाट पर दिया गया अर्घ्य

नेपाल से निकलने वाली सरिसवा नदी इस बार प्रदूषित ही रही।जिस कारण ज्यादातर श्रद्धालुओं ने छठ पूजा के लिए नदी के बजाय सूर्य मंदिर, तुमडीया टोला शिव हनुमान मंदिर में ही पूजा अर्चना की और अर्घ्य दिया।अनेकों व्रतियों ने अपने घर के प्रांगण अथवा छत पर ही पूजा की।वहीं,नदी के किनारे कृत्रिम घाट भी बना कर अर्घ्य दिया गया।इस दौरान व्रती जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए छठी मईया से सद्बुद्धि मांगते दिखे,ताकि, सरिसवा नदी की साफ सफाई और प्रदूषण मुक्ति की पहल हो और यह नदी फिर से पवित्र और निर्मल हो सके।बता दे की यह नदी रक्सौल वीरगंज की लाइफ लाइन नदी मानी जाती है,जिसके घाट पर परम्परागत रूप सदियों से छठ पूजा होता आ रहा है।

बता दे कि शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य के अर्घ्य के साथ चार दिवसीय चैती छठ पूजा का समापन होगा। इससे पहले व्रतियों ने बुधवार शाम भगवान भास्कर की आराधना की थी और खरना किया था।
खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ हो गया।पर्व के चौथे और अंतिम दिन यानी शुक्रवार को उगते सूर्य के अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालुओं का व्रत समाप्त हो जाएगा।

छठ कर रही व्रतियों ने बताया कि यह व्रत परिवार की सुख समृद्धि शांति व संतान की लंबी आयु और जीवन की प्राप्ति के लिए की जाती है। यह व्रत जीवन में संयम, शुद्धता और आत्म नियंत्रण की भावना को जागृत करता है।

गौरतलब है कि चैत्र नवरात्र के बीच होने वाले इस पर्व को ले कर श्रद्धालु देवी पूजा के साथ छठी मईया की आराधना में जुटे दिखे।संध्या काल कोसी पूजा भी हुई।

दो बार मनाई जाती है छठ

छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है, जिसे चैती छठ पूजा और कार्तिक छठ पूजा के नाम से जाना जाता है। चैती छठ पूजा चैत्र महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, पंचमी, षष्टी और सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वहीं, कार्तिक छठ पूजा दिवाली के 6 दिन बाद कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, पंचमी, षष्टी और सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। चैती छठ से ज्यादा कार्तिक महीने में पढ़ने वाले छठ के बारे में लोग बहुत ही अधिक सुने और जानते हैं। बहुत कम लोगों को ही इसके बारे में पता होता है।

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