
रक्सौल ।(Vor desk)।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रक्सौल द्वारा भारतीय (हिन्दू ) नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर आर्यसमाज परिसर में पूर्ण गणवेश में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सभी स्वयंसेवकों ने सर्वप्रथम आद्य सरसंघचालक प्रणाम दिया, फिर ध्वज लगा कर आगे का कार्यक्रम शुरू हुआ l सामूहिक देशभक्ति गीत एवं अमृत वचन के बाद स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुये संघ के उत्तर बिहार के सह प्रान्त संघचालक प्रो० राजकिशोर सिंह ने सभी को भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुये बताया कि आज के ही दिन मानव सृष्टि का प्रारम्भ हुआ था, तबसे लगभग एक अरब संतानबे लाख एकावन बार पृथ्वी सूर्य के चारो ओर चक्कर लगा चुकी है l इस दीर्घ काल में चारो युग सतयुग, त्रेता, द्वापर के 28 काल चक्र (युग ) बीत चूके हैं एवं कलियुग का 27 युग पूर्ण होकर वर्तमान में युग में 5126 वर्ष पूरा हो रहा हैं तथा आज युगाब्द 5127 में प्रवेश कर रहा हैं l आज भी बहुसंख्यक हिन्दू समाज धार्मिक और मांगलिक कार्यों के शुभ अवसर पर भारतीय तिथियों का प्रयोग करता हैं l आज से चैत्र नवरात्र भी प्रारम्भ होता हैं l इस अवसर पर नवग्रह की पूजा की जाती हैं l संवत किसी भी राष्ट्र के जाति, पराक्रम, गौरव, यशस्वी कार्य, महापुरुषों के कृति एवं राष्ट्र के क्रमबद्ध प्रगति की याद दिलाता है जिससे समाज अनुप्राणित होता हैं l पूरे देश में इसे विभिन्न नामों जैसे गुड़ी परवा, चैत्र नवरात्रा आदि के रूप में मनाया जाता है l आज के ही दिन स्वामी दयानन्द के द्वारा आर्य समाज की स्थापना की थी, संघ संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्मदिन भी हैं l प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक, राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत का प्रारम्भ, शालिवाहन शक संवत का प्रारम्भ, सिखों के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्मदिन आदि महत्वपूर्ण दिवस है जिसे पूरा समाज हर्षोल्लास से मनाता है l

इस अवसर पर नगर कार्यवाह भरत कुमार, जिला कार्यवाह दुर्गेश कुमार, विकास कुमार, चैतन्य कुमार, प्रकाश कुमार, सुबोध कुमार, मनोज कुमार, संतोष कुमार, परमानन्द गिरी, सचिन कुमार, राजू कुमार, अक्षय रंजन आदि उपस्थित रहे l
इस अवसर पर संघ के उत्तर बिहार के सह प्रांत संघसंचालक प्रो० राजकिशोर सिंह ने बताया कि संघ अपने शताब्दी वर्ष पूरा कर रहा है, अत: इस अवसर पर हमें संघ कार्य को गांव- गांव तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए और संघ कार्य हेतु अधिक से अधिक समय देना चाहिए ताकि एक समरस एवं सबल राष्ट्र का निर्माण हो जो पूरे विश्व के लिए अनुकरणीय हो। अन्त में प्रार्थना एवं प्रसाद वितरण के बाद कार्यक्रम संपन्न हुआ l