Thursday, April 3

नेटवर्किंग कंपनी वाले बेरोजगार युवकों को बंधक बना कर काम के नाम पर करते थे शोषण ,एसएसबी और पुलिस के बड़े ऑपरेशन में रक्सौल से 400युवक को किया गया रेस्क्यू

रक्सौल।(Vor desk)।भारत नेपाल सीमा क्षेत्र के रक्सौल शहर में पुलिस और एसएसबी,एनजीओ की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार सौ बालिग और नाबालिग युवकों को नेटवर्किग कंपनी से मुक्त कराया है।बिहार में पहली बार इस तरह और इतनी बड़ी संख्या में बेरोजगार युवकों को रेस्क्यू किया गया है। आरोप है कि नेटवर्किंग कंपनी वाले इन सभी युवकों को बंधक बनाकर काम करवाते थे। ट्रेनिंग और रोजगार का झांसा देकर बच्चों को फंसाते थे और उनके परिजनों से 20-20 हज़ार रुपये की वसूली की जाती थी।शैक्षणिक प्रमाण पत्र रख कर विभिन्न प्रकार से शोषण किया जाता था।पुलिस को परिवार वालों ने सूचना दी जिसके बाद एसएसबी और रक्सौल पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी की, जिसमें शहर के विभिन्न जगहों से 400 युवकों को मुक्त कराया।

इस तरह पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस पूछ ताछ में सामने आया है कि मुक्त सभी युवकों को बिन मेकर और डीबीआरओ ग्रुप कंपनी द्वारा बंधक बनाकर ब्रेनवाश किया जा रहा था, और फर्जी नेटवर्क का जाल बिछाकर लोगों से फर्जीवाड़ा करते थे।रेस्क्यू किए गए बच्चों में बिहार (नवादा, भागलपुर), झारखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और नेपाल के बच्चे शामिल हैं। बच्चों को सिंडिकेट नेटवर्क के ज़रिए रक्सौल और आसपास के इलाकों में रखा जाता था।
जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी बच्चों को दवा दुकान, दवा कंपनियों में काम दिलाने का लालच देती थी। बच्चों को बताया जाता था कि उन्हें मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एम आर) या सेल्स एजेंट की नौकरी मिलेगी। इसके लिए बच्चों से 20,000 रुपये की वसूली की जाती थी।ट्रेनिंग के नाम पर बच्चों को घर-घर जाकर उत्पाद बेचने या फर्जी नेटवर्किंग बिजनेस में लगाया जाता था।बच्चों को कहा जाता था कि ट्रेनिंग पूरी होने पर उन्हें बड़े शहरों में नौकरी दी जाएगी, लेकिन असल में उन्हें गुमराह कर काम कराया जाता था।
कंपनी बच्चों से पैसे वसूलने के बाद भी गार्जियन को फोन कर अतिरिक्त रकम मांगती थी। जो अभिभावक पैसे देने में असमर्थ होते, उनके बच्चों को अलग स्थान पर रखा जाता था।

बीती रात्रि शुरू हुआ अभियान,अलग अलग मोहल्लों में छापेमारी

उक्त अभियान पूर्वी चम्पारण एसपी स्वर्ण प्रभात की निगरानी में अंजाम दिया गया।अभियान में एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट दीपक कृष्ण काफी सक्रिय थे।ऑपरेशन में 90 जवान लगे थे,जिनमें महिला सुरक्षाकर्मी भी शामिल थीं। शहर के अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई, जो देर रात तक जारी रही।रेस्क्यू किए गए बच्चों को थाना परिसर लाकर आधार कार्ड चेक किए जा रहे हैं और उनके गार्जियन से संपर्क किया जा रहा है। बच्चे डरे हुए हैं और धीरे-धीरे आपबीती साझा कर रहे हैं। प्रशासन बच्चों की काउंसलिंग कर उनके मानसिक स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रहा है।वहीं,इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है,जो इस सिंडिकेट से जुड़े बताए गए हैं।हालाकि,उनका विवरण और इस बारे में विशेष जानकारी पुलिस ने साझा नहीं की है।जब तक थाना में करवाई चलती रही,एसएसबी अधिकारी भी थाने में जमे रहे।स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि यह रैकेट वर्षों से सीमा पर सक्रिय था। उच्चाधिकारियों को मिली शिकायत के बाद यह बड़ी कार्रवाई संभव हो सकी।
डीएसपी धीरेंद्र कुमार ने कहा कि फर्जी नेटवर्किंग कंपनी के सरगनाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी हो रही है। उनके मोबाइल डेटा, लेन-देन और नेटवर्क की जांच की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

क्या कहते हैं एसपी स्वर्ण प्रभात

इस मामले में मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों में कुछ नाबालिक भी हैं ।कानून के अनुसार श्रम प्रवर्तन अधिकारी को सूचित किया गया है।जिन बच्चों को रेक्स्यू किया गया है,उनके आवेदन के आधार पर करवाई की जा रही है।मामले में ग्रुप संचालक सहित घटना में शामिल चार पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।पूछ ताछ जारी है। नेटवर्क कंपनी पहले गोपालगंज सहित कई जिले में भी काम करती थी,वहां पर वाक्या सामने आने पर कार्रवाई हुई थी। उसके बाद अब इस जिले में अपना जाल बिछा लिया था पर अब इस मामले में विस्तृत जांच और नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एसडीपीओ के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है ।गहराई से जांच की जा रही है ।जो भी दोषी होंगे या गैर कानूनी कार्य में शामिल होंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।बच्चों को जो ब्रेनवाश करने का काम किया जा रहा था,जबरन बंधक बना कर रखा गया ,परिजनो से पैसे वसूले गए थे,इन सब को ले कर लगातार एक्शन जारी रहेगा।किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

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