Friday, April 4

रक्सौल की डा.अजरा खातून ने पास किया नीट,मद्रास से करेंगी डीएनबी कार्डियोलॉजी(सिटीवीएस) की पढ़ाई!

रक्सौल।(Vor desk)।’खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले खुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है! रक्सौल की पतोहु डा. अजरा खातून के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। इस उक्ति को शत प्रतिशत चरितार्थ करते हुए उन्होंने नीट परीक्षा पास की है।अब वे डीएनबी कार्डियोलॉजिस्ट(सिटीवीएस) बनने के लिए छह साल का कोर्स करने मद्रास मेडिकल कॉलेज जा रही हैं।इस कोर्स को पूरा करने के बाद वे कार्डियोथोरेसिक सर्जरी के सुपरस्पेशलिस्ट की डिग्री हासिल करेंगी।
दरअसल,सुनने में यह जितना सुखद लग रहा है, वास्तव में इतना आसान नहीं था।उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लग्न से इस मुकाम तक पहुंची और अपनी चाहत वाली मंजिल को पाने के लिए संघर्ष किया।यह ऐसी डिग्री है ,जो आसान नहीं होती। एम बी बी एस के ढाई लाख लोग एक्जाम देते हैं और उनमें सलेक्शन होता है।चम्पारण में कार्डियो की सुपरस्पेलिस्ट नहीं के बराबर हैं।

एमबीबीएस एवं गाइनी चिकित्सक डॉक्टर अजरा फिलहाल गोपालगंज में मेडिकल ऑफिसर के पद पर पिछले चार साल से सेवा दे रही हैं।अपने पुराने दिनों को याद करते हुए वे बताती हैं कि मेरी शादी 2009में हुई थी तब मैं 11वीं में थी।शादी के बाद मेरे ससुराल वालों ने मुझे सहयोग किया तो पढ़ाई जारी रख सकी और 10+2 उत्तीर्ण हुई।इस बीच दो बेटियां भी हुईं।लेकिन,पढ़ाई जारी रही।वर्ष2018में एम बी बी एस किया एवं वर्ष 2019में मुजफ्फरपुर में मेडिकल ऑफिसर के रूप में योगदान किया।इसके बाद एन एम सी एच में एनस्थीसिया डिपार्मेंट में एनसेथेटिक के रूप में चार माह सेवा दी।वह कोरोना काल था।फिर,पटना पीएमसीएच से गाइनी का कोर्स किया।लेकिन,दिल में था की कार्डियो में सुपरस्पेशलिटी का कोर्स करना इसलिए निट की तैयारी करने लगी।आखिर वह घड़ी आ गई,जिसमे मुझे सफलता मिली।मेरा लक्ष्य है कि इस कोर्स को करने के बाद अपने क्षेत्र ने सेवा दूं ।वे कहती हैं कि पैसा कमाना कभी भी मेरा मुख्य मकसद नहीं रहा।मैं चाहती हूं कि मेडिकल क्षेत्र में बेहतर सेवा दूं और लोगों का भला हो।उन्होंने संदेश में कहा कि यदि लगातार लगन और सच्चे मन से प्रयास,परिश्रम हो तो सफलता अवश्य मिलती है।

डा आजरा का मायके अनुमंडल के नकरदेई में है। रक्सौल के परेउवा वार्ड 17में उनका ससुराल हैं।वे हाजी मुख्तार व पूर्व पार्षद अमूल नेशा की बहु हैं।व्यापार करने वाले शाने इलाही उनके पति हैं,जिन्होंने इस कहावत को बदल दिया है की हर सफल शख्स के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ होता है।उन्होंने यह साबित किया है की यदि पति का साथ मिले तो शादी शुदा महिलाएं भी सफलता का परचम लहरा सकती हैं। शाने इलाही उर्फ बच्चा बाबू कहते हैं की मेरी तमन्ना है की वो एक सफल चिकित्सक बन कर मुकाम हासिल करें और लोगों की सेवा करें।

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