Sunday, November 1

भारत और नेपाल के बीच उच्च शिक्षा साझेदारी के तहत नई दिल्ली स्थित आईआईटीएम में आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार : बैठक में लिया गया निर्णय

  • जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण प्राकृतिक आपदा झेल रहे देशों की चुनौतियाँ और उनके समाधान पर भी होगी चर्चा
  • त्रिभुवन विश्वविद्यालय (नेपाल) अंतर्गत वीरगंज स्थित ठाकुरराम बहुमुखी कैंपस के छात्र और शिक्षक प्रतिनिधि भी होंगे अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में शामिल

रक्सौल।(Vor desk)। भारत और नेपाल के बीच उच्च शिक्षा की साझेदारी के तहत एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किए जाने को लेकर नई दिल्ली में एक बैठक आयोजित की गई।

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली अंतर्गत इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईआईटीएम) में संपन्न उक्त बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई।

आईआईटीएम की डायरेक्टर डॉ. (प्रो.) रचिता राणा और वरीय प्राध्यापक डॉ. (प्रो.) स्वयंभू शलभ के संयोजकत्व में यह बैठक संपन्न हुई।

बैठक में आईआईटीएम के रिसर्च सेल सदस्य डॉ. अनुराग तिरुवा, मैनेजमेंट विभाग की हेड डॉ. दीपिका अरोड़ा, बीबीए प्रोग्राम की हेड डॉ. दीपाली सलूजा और प्लेसमेंट हेड मंदीप सिंह ने अपने विचार रखे। यह निर्णय लिया गया कि आने वाले वर्ष में नई दिल्ली में ‘क्लाइमेट चेंज, सस्टेनेबिलिटी एंड ग्लोबल एनवायरनमेंटल थ्रेट : चैलेंजेस एंड इनोवेशंस’ संबंधित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन होगा जिसकी मेजबानी आईआईटीएम करेगा। सेमिनार में आईटी और मैनेजमेंट के छात्र और शिक्षक प्रतिनिधि हिस्सा लेगें।

गौरतलब है कि इस सेमिनार में जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर के फटने और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदा झेल रहे देशों की समस्या और उसके समाधान पर भी चर्चा होगी।

विदित है कि गत मई महीने में प्राध्यापक डॉ. स्वयंभू शलभ के संयोजकत्व में आईआईटीएम और त्रिभुवन विश्वविद्यालय अंतर्गत वीरगंज स्थित ठाकुरराम बहुमुखी कैंपस के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे।

डॉ. शलभ ने कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के क्षेत्र में अकादमिक आदान-प्रदान, शैक्षिक दक्षता अभिवृद्धि, संयुक्त अनुसंधान, पाठ्यक्रम साझाकरण और छात्र-संकाय विनिमय को बढ़ावा देगा। यह सेमिनार कैंपस की शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों को नई तकनीक और कौशल सीखने का मौका भी मिलेगा जो उनके व्यक्तिगत और पेशेवर विकास में सहायक होगा।

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