
रक्सौल सहित विभिन्न अंचलों से जुड़े मामलों में दिए निर्देश, गलत खेसरा सुधारने से लेकर अतिक्रमण व योजनाओं में अनियमितता की होगी जांच
मोतिहारी। (Vor desk)। जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने मंगलवार को अपने कार्यालय कक्ष में द्वितीय अपील अंतर्गत 10 मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान परिवादी कार्यालय कक्ष में उपस्थित रहे, जबकि संबंधित लोक प्राधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। सुनवाई में भूमि विवाद, अतिक्रमण, आवास योजना, मनरेगा कार्य में अनियमितता और दस्तावेज में गड़बड़ी से जुड़े मामले सामने आए। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में जांच कर कार्रवाई का प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

आदापुर के सहदेव ठाकुर ने बंदोबस्ती परवाना में पर्चे का खेसरा गलत दर्ज होने की शिकायत की थी। डीएम ने अंचल अधिकारी आदापुर को पांच दिनों में अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय जाकर अभिलेख के आधार पर खेसरा में सुधार कराने और पर्चा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कार्रवाई की रिपोर्ट द्वितीय अपील कार्यालय को भेजने को कहा गया।
रामगढ़वा के अखिलेश्वर प्रसाद यादव का मामला अतिक्रमण से जुड़ा था। डीएम ने अंचल अधिकारी को मामले की गंभीरता से जांच कर रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने और उसे आवागमन योग्य बनाने का निर्देश दिया।
मोतिहारी सदर अंचल के सुनील कुमार कुशवाहा ने खतियानी भूमि पर जबरन सड़क बनाए जाने की शिकायत की। वीडियो कांफ्रेंसिंग से बीडीओ से जानकारी लेने पर बताया गया कि सड़क ग्राम पंचायत की योजना से बनी है और इसकी जांच भी कराई गई है। डीएम ने पुन: नापी कराकर जांच करने का निर्देश सदर एसडीओ मोतिहारी को दिया।
सदर अंचल के नरेश प्रसाद के फर्जी दस्तावेज के आधार पर मौजा स्थानांतरण संबंधी मामले में डीएम ने अपर समाहर्ता, पूर्वी चंपारण को पुन: जांच कर 10 दिनों में प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया। डीसीएलआर सदर ने इसे परिमार्जन से जुड़ा मामला बताया था, जिसकी पूर्व में जांच कराई जा चुकी है।
घोड़ासहन के रामाधार राय ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की। उनका कहना था कि उनके नाम पर दूसरे के घर की तस्वीर लगा दी गयी है। डीएम ने बीडीओ घोड़ासहन को स्वयं स्थल जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
सुगौली के रामबाबू प्रसाद ने पंचायत में कराए गए कार्य में अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि श्रमदान से मिट्टी भराई का काम हुआ था, लेकिन उसे मनरेगा के तहत दिखाकर राशि की निकासी कर ली गयी। डीएम ने बीडीओ सुगौली को तीन दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया कि कार्य वास्तव में हुआ या नहीं और कितनी राशि की निकासी हुई। साथ ही संबंधित पंचायत में नल-जल योजना की भी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा।
